Tuesday, 3 April 2018

106. गुनाह के फूल- गुलशन नंदा

जब गुनाह के फूल खिले.....
गुनाह के फूल- गुलशन‌ नंदा, मर्डर मिस्ट्री, रोचक, पठनीय।
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     गुलशन मूलतः एक सामाजिक उपन्यासकार हैं और अपने समय के सर्वाधिक चर्चित उपन्यास लेखक भी रहें हैं। इनके सामाजिक उपन्यासों पर बहुत सी चर्चित फिल्में भी बन चुकी हैं। 

            गुलशन नंदा का प्रस्तुत उपन्यास गुनाह के फूल एक‌ मर्डर मिस्ट्री है। मेरे विचार से ऐसा इनका यह एकमात्र उपन्यास ही होना चाहिए। घटना चाहे कोई भी हो वह समाज से विलग नहीं हो सकती, ठीक उसी तरह यह मर्डर मिस्ट्री भी समाज की ही एक घटना पर आधारित है। लेकिन लेखन ने इस पर समाजिकता हावी नहीं होने दी और इसी कारण से गुलशन नंदा का यह उपन्यास उनके अन्य सामाजिक उपन्यासों से अलग हटकर मर्डर मिस्ट्री की श्रेणी में आ जाता है।

        उपन्यास की कथा कोई ज्यादा बङी नहीं है और न ही पात्र ज्यादा हैं और ठीक उसी अनुपात में उपन्यास के पृष्ठ हैं। उपन्यास की कहानी, पात्र और पृष्ठ के अनुपात में उपन्यास रोचक और पठनीय बना है।
 
    क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान सुशील अपने छोटे भाई नवीन के साथ मुंबई एक्सप्रेस से अपनी‌ जीजी से मिलने भोपाल जा रही थी । वह अकेली न थी, बल्कि उसका छोटा भाई नवीन भी उसके सामने वाली सीट पर बैठा था। नवीन का अकेले बहन के संग रेल में यात्रा करने का पहला अवसर था। सुशील काॅलेज में पढती थी और नवीन तीसरी कक्षा का विद्यार्थी था। दोनों क्रिस्मस की छुट्टियां काटने अपनी बङी बहन के पास भोपाल जा रहे थे। (पृष्ठ-03)  लेेकिन रास्ते में, ट्रेन में, रात के अंधेरे में किसी शैतान ने सुशील से दुराचार कर उसकी हत्या कर दी और उसके छोटे भाई को हाथ बांध कर टाॅयलेट में बंद कर दिया।
        सुशील का जीजा हरदयाल जो की भोपाल रेल्वे पुलिस का इंचार्ज था। वह इस केस की छानबीन करता है और एक मोङ पर जाकर वह स्वयं आश्चर्यचकित रह जाता है।  तस्वीर को ध्यान से देखते ही उसके मस्तिष्क पर एक अँधेरा सा छाने लगा। उसके हृदय की धङकने तेज हो गयी। टाँगें क्षण भर के लिए लङखङा सी गयी। पाँव तले की धरती खिसकती हुयी दिखाई देने लगी। उसे विश्वास न आ रहा था कि यह तस्वीर उस अपराधी की है...कहीं बहुत बङी भूल तो नहीं हो गयी.....कठिनता से अपने आपको सँभालते हुए वह पास के बिछे हुए बैंच पर बेसुध सा बैठ गया। (पृष्ठ-75) लेकिन अंतत: वह अपराधी को पकङने में कामयाब होता है।
            उपन्यास की‌ कहानी हालांकि छोटी सी है। एक हत्या और फिर मुजरिम को पकङना लेकिन उपन्यास में विशेष है इस दौरान की छोटी-छोटी घटनाएं । छोटे-छोटे तथ्यों और सबूतों के आधार पर कैसे एक पुलिसकर्मी अपराधी तक पहुंच पाता है। उपन्यास में कुछ ट्विस्ट भी हैं जो स्वयं हरदयाल को भी विचलित कर देते हैं। लेकिन एक कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार हरदयाल अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होता।
     
                 गुलशन नंदा का उपन्यास पढना स्वयं में एक रोचकता है, और वह भी जब मर्डर मिस्ट्री हो तो क्या कहना। उपन्यास में कहीं भी अनावश्यक वार्तालाप, दृश्य नहीं है। उपन्यास बहुत ही हल्का-फुल्का है। अन्य जासूसी या मर्डर मिस्ट्री उपन्यासों की तरह उलझा हुआ नहीं है। यही उपन्यास की विशेषता है।
         उपन्यास पूर्णतः पठनीय है। अगर आप कम समय के लिए कोई रोचक उपन्यास पढना चाहो तो यह उपन्यास अवश्य पढें इसमें पाठक को कहीं भी अनावश्यक दिमाग लगाने की आवश्यकता नहीं है। उपन्यास का धीमा प्रवाह पाठक को अपने साथ धीरे-धीरे बहा ले चलता है।
       एक सामाजिक उपन्यासकार का मर्डर मिस्ट्री उपन्यास पढना स्वयं में रोचक है।
उपन्यास पठनीय है।
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उपन्यास -    गुनाह के फूल
लेखक-       गुलशन नंदा
प्रकाशक-    अशोक पॉकेट बुक्स- 4/36, रूपनगर, दिल्ली
पृष्ठ-          109

1 comment:

  1. बढ़िया... उपन्यास पढ़ने की ललक मन में जगी है...मिलता है तो पढ़ूँगा जरूर..

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