Saturday, 22 July 2017

51. किसका कत्ल करुं- टाइगर

क्या आप में एक जासूसी दिमाग है?
अगर हां! तो प्लीज बताइए...
मेरे परिवार का कातिल मेरा कौन सा ब्वाॅयफ्रेण्ड है? और कैसे है?
यह चैलेंज है टाइगर द्वारा लिखित उपन्यास 'किसका कत्ल करुं' में।
प्रस्तुत उपन्यास एक दिमागी जंग है।
लेखक का दावा है कि इस जंग को सिर्फ वही पाठक जीत सकता है, जिसके दिमाग के दरवाजे और खिङकियां खुली हुयी हैं।
  दावे में कितनी सच्चाई है- यह जानने के लिए पढिए प्रस्तुत उपन्यास और ईनामी प्रतियोगिता में शामिल होकर जीतिए 5100/- के आकर्षक पुरस्कार।
(उपन्यास के अंदर के शीर्षक पृष्ठ से)
यह उपन्यास स्वयं में एक पहेली होने के साथ-साथ एक नया प्रयोग भी है।
पहेली तो इस दृष्टि से है की पाठक को उपन्यास की नायिका सोनाली महाजन के परिवार के हत्यारे को पकङना है। पाठक के समक्ष चार पात्र हैं और उन्हीं चारों में से एक कातिल भी है।
प्रयोग इस दृष्टि से है की उपन्यास का कोई अन्य भाग नहीं है, उपन्यास स्वयं में पूर्ण है, लेकिन पाठक के समक्ष एक प्रश्न छोङकर चला जाता है  और वह प्रश्न है की सोनाली महाजन के परिवार का कातिल कौन है?
कहानी-
       उपन्यास की कहानी सोनाली महाजन को मिले उस पत्र से होती है जिसमें यह वर्णन होता है की उसका पङोसी अनिल वर्मा उसके परिवार को मौत के घाट उतार देगा।
  सोनाली इस पत्र को लेकर सब-इंस्पेक्टर सुधीर गुप्ता से मिलती है और क्रिमिनल वकील रंजीत चौहान से भी संपर्क करती है।
मुकेश चांदना, जो की सोनाली के बचपन का मित्र है और एक और पात्र है नरेश मेहता जो की एक विशेष घटना के दौरान सोनाली से मिलता है।
सोनाली के जन्मदिन की एक छोटी सी पार्टी में सुधीर गुप्ता, नरेश मेहता, मुकेश चांदना, रंजीत चौहान और रंजीत की बहन प्रिया शामिल होते हैं।
इस पार्टी के दौरान सोनाली की बहन पर जानलेवा हमला होता है और सोनाली के पापा प्रमोद महाजन के टांग में कोई अज्ञात शख्स गोली मार देता है।
यहीं से सोनाली के परिवार पर मुसीबतों के पहाङ टूट पङते हैं और एक दिन सोनाली के मम्मी-पापा व बहन की हत्या हो जाती है।
हत्यारा कौन है यह प्रश्न अंत तक यथावत बना रहता है।
पात्र- उपन्यास में पात्रों की संख्या बहुत है लेकिन कोई भी पात्र ऐसा नहीं है जो कहानी के अनुकूल न हो।
सभी पात्र यथासंभव अपने किरदार को अच्छी तरह से निभाते हैं।
मुख्य पात्रों के अतिरिक्त अन्य पात्र हैं- चांदराम, कब्बाङी, रिश्तेदार, सुनंदा, ख्याली राम,बाॅस, मनीषा इत्यादि ।
कब्बाङी और रिश्तेदार -
उपन्यास के यह दो ऐसे पात्र हैं जो स्वयं में एक अजूबा होते हुए भी महत्वपूर्ण हैं‌। कहानी का अधिकांश भाग इन्हीं दो पात्रों पर टिका है‌।
दोनों पात्र रहस्यमय होते हुए भी पाठक को हँसाने में सक्षम है।
उपन्यास में कमी-
उपन्यास में कत्ल पर कत्ल होते हैं और अंत तक कातिल का पता नहीं चलता, भविष्य में किस उपन्यास में यह रहस्य खोला गया है इसका कहीं भी वर्णन नहीं ।
- सोनाली महाजन को जो व्यक्ति सर्वप्रथम एक पत्र लाकर देता है, अगर सोनाली उससे यह पूछ लेती की तुम्हें कैसे पता चला की मैं सोनाली महाजन हूँ, यह मेरा घर है, तो कहानी बहुत हद तक बदल जाती।
- इसके अलावा और भी बहुत सी उपन्यास में कमियां है पर वो कातिल पकङे जाने तक न बताने योग्य हैं।
उपन्यास पढें-
उपन्यास बहुत ही रोचक है, उक्त कमियों को नजरंदाज करके पढें तो मुझे विश्वास है ये उपन्यास पाठक को लंबे समय तक याद रहेगा।
जब भी टाइगर या इस उपन्यास का नाम आयेगा तब भी कातिल को तलाशता रहेगा, वर्षां बाद भी।
क्योंकि यह एक
अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री है।

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  उपन्यास- किसका कत्ल करुं
लेखक- टाइगर (JK Verma)
प्रकाशन- राजा पाकेट बुक्स, दिल्ली
पृष्ठ-272
मूल्य-20₹

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