Wednesday, 31 May 2017

47. द ओल्ड फोर्ट- एम. इकराम फरीदी

युवा लेखक एम. इकराम. फरीदी का प्रथम उपन्यास 'द ओल्ड फोर्ट- भूतों की एक गाथा' पढने को मिला। जैसा की नाम से ही स्पष्ट होता है इस उपन्यास में कहानी किस प्रकार है, वैसा ही विचार पाठक के मन में उभरता है। वह विचार एक हद तक सही भी है, लेकिन लेखक ने उपन्यास का प्रस्तुतीकरण इस प्रकार किया है की पाठक एक बार उपन्यास उठाने के बाद अंतिम पृष्ठ पढ कर ही रहेगा।
उपन्यास की कहानी की बात करें तो इसका प्रथम दृश्य ही पाठक को स्वयं में बांधने में सक्षम है।
एक गांव है बहरामपुर, उसी गांव के पास है एक है प्राचीन किला। इस किले के बारे में प्रसिद्ध है की इसमें भूत रहते हैं। इस किले का मालिक चौधरी सुखबीर सिंह इस जमीन को बेचना चाहता है लेकिन भूत किला होने के कारण लोग इसे खरीदते नहीं। जिन-जिन लोगों ने इस जमीन को खरीदने की कोशिश की तो उनको बहुत हानि उठानी पङी।
      डाॅक्टर भगनानी, जो की एक मनोवैज्ञानिक है, वे भूत-प्रेतों पत विश्वास नहीं करते। किले की जमीन का मालिक सुखबीर चौधरी इस जमीन से किले को ढहाने का सौदा एक अरब में डाॅक्टर से सौदा करते है। एक अरब में मात्र एक किला ही ढहाना है, डाॅक्टर भगनानी के कान भी खङे हो जाते हैं और भगनानी का साथी डाॅक्टर के मन में भी कातिलाना हवस जाग जाती है।
तब डाॅक्टर भगनानी व डाॅक्टर गाबा मिलकर अपने छह विद्यार्थियों की एक टीम तैयार करते हैं।
किला भी कोई मामूली नहीं। किलें में नरभक्षी वृक्ष हैं, कच्छप जितने बङे बिच्छू हैं और भेडियों का बसेरा भी है।
किले का एक दृश्य देखिएगा-
इस चीख ने सबके कलेजों को थर्रा दिया।
सबने पूछा, -"क्या हुआ?"
शुभम् की भयग्रस्त दृष्टि जिधर उठी थी, उधर ही उसने इशारा कर किया, -" वो देखो।"
सबने उधर देखा। उन सबके प्राण कांप उठे थे।
यह वही स्थान था जहां बिच्छू को मारा गया था। लोथङों में तब्दील बिच्छू वहीं होना चाहिए था, लेकिन अब नहीं था। वहीं दीवार पर खून से अंग्रेजीकैपिटल वर्ङ में लिखा था।
You are welcome
  - क्या किले में भूत है?
- सुखबीर चौधरी क्यों किले को तोङने के लिए एक अरब रुपये देने को तैयार हो गया?
- डाॅक्टर के लालच का क्या परिणाम निकला?
- किले में प्रवेश करने पर डाॅक्टर की टीम को क्या -क्या परेशानी आयी?
इन सब उलझे सवालों के जवाब तो एम. इकराम फरीदी कर उपन्यास को पढकर ही मिलेंगे।
उपन्यास किसी अंधविश्वास का समर्थन नहीं करता अपितु भूत-प्रेत आदि को स्थापित करने वाले व्यक्तियों का विरोध कर एक अच्छे समाज निर्माण का सपना दिखाता है।
"ये तो और भी हैरानी की बात हो गयी- इन गुरुओं ने भूतों को पैदा कर दिया लेकिन नाश नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा क्यों?" (पृष्ठ-17)
" हमारा टारगेट है कि लोग अंधविश्वास के विरोधी बन जायें। एक से कम इतने जागरुक तो हो जाएं की अंधविश्वास को जानने लग जाए कि अंधविश्वास कहते किसे हैं।" (पृष्ठ-27)
उपन्यास की विशेषता-
पाठक के मन में विचार उठता होगा की हम इस उपन्यास को क्यों पढें तो इसके कई कारण है।
1. उपन्यास अंधविश्वास का खण्डन करता है और एक वैज्ञानिक सोच स्थापना की कोशिश करता है।
2. भूत- प्रेत आदि के विचारों को जङ से खत्म करने में सहायक है।
3. यह उपन्यास विशेष तौर पर किशोरों के लिए अति उपयोगी है, और देखा जाये तो यह एक किशोर श्रेणी का उपन्यास है।
3. उपन्यास मनोविज्ञान को महत्व देता है।
4. मनोरंजन के साथ-साथ मानसिक समझ विकसित करने में सहायक है।
उपन्यास में कमियां-
लेखक जो भी रचना करता है उसमें कोई न कोई कोई रह जाती है। उपन्यास में भी कुछ कमियां है लेकिन वे कथ्य को निष्प्रभावी नहीं बनाती।
1.उपन्यास में शाब्दिक गलतियाँ हैं। यह मुद्रक की गलती है लेखक की नहीं ।
2. उपन्यास में सस्पेंश (रहस्य) है, लेकिन लेखक सस्पेंश को लंबा नहीं खीच पाया। सस्पेंश बनने के साथ-साथ खत्म हो जाता है।
3. डाॅक्टर गाबा का अपनी पुत्री अक्षरा को कत्ल का कहना अजीब सा लगता है। (पृष्ठ-51-55)
4. पृष्ठ संख्या 106-110 पर डाॅक्टर भगनानी का व जासूस सुभाष कौशिक का वार्तालाप कुछ लंबा व विषय से अलग भटक गया लगता है।
यह उपन्यास बहुत ही रोचक, संस्पेंशपूर्व है। जहां उपन्यास में भूत- प्रेत को विषय बनाया गया है वहीं मनोविज्ञान के माध्यम से भूत- प्रेत व अंधविश्वास का खण्डन कर एक वैज्ञानिक समाज निर्माण की इच्छा व्यक्त की गयी है।
लेखक इकराम फरीदी का प्रस्तुत प्रथम उपन्यास बहुत अच्छा है और यह सभी वर्ग के लिए उपयोगी व ज्ञानवर्धक है।

--------------------------------------------------------
उपन्यास - द ओल्ड फोर्ट- भूतों की एक गाथा ( हिंदी)
ISBN NO. 81-88388-96-3
लेखक- एम. इकराम फरीदी
प्रकाशन- हिंदी साहित्य सदन- दिल्ली
www.hindisahityasadan.com
मूल्य- 125₹
पृष्ठ- 223

No comments:

Post a Comment